यहाँ है दुनिया का सबसे बड़ा आम का बगीचा


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कुत्ता, बिल्ली और अन्य पालतू जानवरों को हम इंसान पाल ही लेते हैं। मगर उन हाथियों का क्या जिनके दाँतों के लिए शिकारी उन्हे गोली मार देते हैं, ऐसे हाथी और बाकी जँगली जानवर कहाँ इलाज कराने जाएं।

यही सवाल, जब मुकेश अम्बानी के बेटे अनंत के दिमाग़ में आया तो उन्होने बना दिया, वनतारा।

क्या है वनतारा, ये है दुनिया का सबसे बड़ा एनिमल रैस्कयु सैंटर। जंगली जानवरों को चोट- चपेट और बिमारियों से बचाने के लिए वनतारा एक बहुत बड़ी आस है। अनंत बताते हैँ, बचपन से ही माँ ने मुझे जीव-जंतुओं की सेवा करना सिखाया। वो बताते हैं कि माँ ने बहुत सारे कुत्तों को पाला था, और वो कहती हैं कि बेज़ुबान की सेवा सबसे बड़ी सेवा है और यही धर्म है। इससे आदमी को बहुत पुण्य मिलता है।

जब पूछा गया, आपको जामनगर कितना पसंद है। तो अनंत कहते हैं। मेरी दादी जामनगर से हैं और दादा जी का एक सपना था, कि हम जामनगर में दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी बनाएं।

पिताजी ने वो सपना साकार किया। जामनगर में ही दुनिया का सबसे बड़ा आम का बाग़ भी है और अब विश्व का सबसे बड़ा वाइल्ड एनिमल रैस्कयु सैंटर भी और यहाँ रिलायंस कमर्चारियों के लिए एक कैलिफोर्निया जैसा टाउनशिप है।

अपने पिता, मुकेश अम्बानी के बारे में बात करते हुए अनंत बताते हैं, पापा को जब भी समय मिलता था तो वह हमें छुट्टियों में घूमाने ले जाते थे। हम काजीरंगा पार्क, रणथंबोर जाते थे और बचपन से ही वाइल्डलाइफ को इतने करीब से देखने के कारण मेरा पशुओं के प्रति प्रेम बढ़ता चला गया।

मैंने सोचा कि पालतू पशुओं की सेवा करने के लिए उन्हें पालने के लिए बहुत सारे लोग काम करते हैं, मगर इन जंगली जानवरों के लिए कोई मदद नहीं है, इसीलिए मैंने दुनिया का सबसे बड़ा एनिमल रेस्क्यू सैंटर बनाने का फैंसला लिया। अपना यह विचार सबसे पहले जब मैंने अपनी माँ को बताया तो माँ ने मुझे बहुत ज़रूरी सलाह दी कि इतने बड़े काम को करने के लिए आपको एक टीम की जरूरत पड़ेगी। आप अकेले इतने बड़े काम को नहीं कर पाओगे।

आगे अनंत जानकारी देते हैं, हमारा वनतारा सैंटर 2000 से अधिक एकड़ में बना है। इसमें 6 सर्जरी सेंटर है, इन पेशेंट वार्ड हैं, आउट पेशेंट वार्ड है, एमआरआई मशीन हैं। यहाँ 100 से अधिक वैज्ञानिक काम करते हैं। वनतारा में हमने अभी तक 25000 से ज़्यादा जानवरों को रेस्क्यू किया है, वंतरा को शुरू करने के लिए फॉरेस्ट ऑफीसर्स ने हमारी बहुत-बहुत मदद की है।

उनका रहना है, कि वह रोजाना कम से कम 2 घंटे वनतारा में जानवरों की सेवा करते हैं। अनंत बताते हैं कि पापा कहते हैं जो करना है, फ़ैंसला लेकर, कर देना चाहिए और कामयाबी ना भी मिले तो पछताना नहीं चाहिए। आगे बढ़ते रहना चाहिए।

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